सैण्ट्रल रेलसाइड वेअरहाउस कंपनी ली
(भारत सरकार का उद्यम - मिनी रत्न श्रेणी-II)
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पृष्ठभूमि
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उद्देश्य
निदेशक मंडल
प्रबंधन
फील्ड अफ़सर
आचरण संहिता

कंपनी की स्थापना

इतिहास
  • केन्द्रीय भंडारण निगम ने अपनी विविधिकरण गतिविधियों के भाग के रूप् में भारतीय रेल के साथ एक करार के पश्चात् बेंगलूरू में वाइटफील्ड गुडस टर्मिनल पर रेलसाइंडिंग के साथ पायलट परियोजना के तौर पर रेलवे की जमीन पर भंडारण सुविधाएं विकसित की थी। यह परियोजना फरवरी, 2002 में आरम्भ हुई जिसके फलस्वरूप् रेलवे को अतिरिक्त कार्य मिलना शुरू हो गया तथा गाहकों को दी जाने वाली सेवाओं में भी सुधार आया। केंद्रीय भंडारण निगम द्वारा हैंडल किए गए कार्गो की मात्रा में वृद्धि हुई। इस परियोजना की सफलता से प्रोत्साहित होकर केंद्रीय भंडारण निगम ने अन्य केंद्रो पर पहचान किए गए रेल टर्मिनलों पर रेलसाइड वेअरहाउसिंग परिसर विकसित करने पर विचार किया।
  • इस दौरान रेल मंत्रालय ने भी विभिन्न रेल टर्मिनलों के निकट देश में अपनी सुविधाओं के बेहतर उपयोग के लिए वेअरहाउसिंग परिसरों की स्थापना हेतु भूमि की पहचान की प्रक्रिया आरम्भ कर दी। इसका लक्ष्य गाहकों को बेहतर सेवा के लिए लॉजिस्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर परिवहन को एक नई दिशा देना था।
  • तद्नुसार रेल मंत्रालय तथा केंद्रीय भंडारण निगम के बीच 22 रेल टर्मिनलों के निकट रेल प्रयोगकर्ताओं के लिए संपूर्ण लॉजिस्टिक हल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वेअरहाउसिंग कॉम्पलैक्स विकसित करने के लिए 20.12.2003 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यह सहमति हुई कि इस उद्देश्य के लिए रेल प्रशासन केंद्रीय भंडारण निगम को अपनी भूमि पट्टे पर देगा।
  • इस गतिविधि में तीव्रता तथा कुशलता लाने के लिए यह निर्णय लिया गया सभी रेलसाइड वेअरहाउसिंग परिसरों को एक नई कंपनी के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जाए। यह नई कंपनी केंद्रीय भंडारण निगम की सहायक कंपनी होगी। तदनुसार 10.07.2007 को सैण्ट्रल रेलसाइड वेअरहाउस कंपनी लि.की स्थापना की गई। तत्पश्चात इस कंपनी ने कंपनी अधिनियम,1956 की धारा 149 (3) के अधीन 24.07.2007 को कार्य प्रारंभ करने का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।